पत्नियों के पीछे छोड़े डिटेक्टिव: हाईप्रोफाइल फैमिली में बहुओं की जासूसी का खुलासा, पुलिस की मिलीभगतपत्नियों के पीछे छोड़े डिटेक्टिव: हाईप्रोफाइल फैमिली में बहुओं की जासूसी का खुलासा, पुलिस की मिलीभगत

Jaipur : राजस्थान में अपने ही अपनों की जासूसी करवा रहे हैं। ATS ने ऐसे कांड का खुलासा किया है, जिसमें 100 से ज्यादा परिवारों की जासूसी कराई गई। सबसे ज्यादा मामले पति-पत्नी और उनके अफेयर से संबंधित जासूसी के हैं।

इस जासूसी कांड को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड है 48 साल का पुष्पेंद्र भूटानी। वह खुद को प्राइवेट जासूस बताता है। पैसों के लिए वह लोगों की पत्नियों का पीछा करता, उनकी गुप्त मीटिंग की तस्वीर खींचता। पति की डिमांड पर उनकी कॉल डिटेल भी निकलवाता कि वह किससे बात कर रही हैं और कितनी देर।

चौंकाने वाली बात है कि इस काम में पुलिस की मिलीभगत भी सामने आई है। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पीछे एक पॉश कॉलोनी में राजस्थान ATS ने दबिश देकर प्राइवेट जासूस को गिरफ्तार किया। उसके लग्जरी फ्लैट और मोबाइल से ऐसे रिकॉर्ड हाथ लगे हैं, जिसको देख अधिकारी भी चौंक गए।

जासूसी के लिए उसने लाखों रुपए के पैकेज तय कर रखे थे। जितनी डिटेल, उतना पैसा। कई बड़े बिजनेसमैन ने अपनी पत्नियों की जासूसी के लिए उसको हायर किया था। यहां तक कि कई परिवारों ने बेटे के लिए बहू तक की जासूसी तक करवाई।

लोगों को पैसे ब्याज पर देने वाला शख्स कैसे इतने बड़े जासूसी कांड का मास्टरमाइंड बन गया। पढ़िए, संडे बिग स्टोरी में…

सबसे ज्यादा पति-पत्नी की जासूसी

ADG (एटीएस-एसओजी) अशोक राठौड़ ने बताया कि पुष्पेंद्र भूटानी के ऑफिस से जासूसी के काम आने वाले हिडन कैमरा और डॉक्यूमेंट मिले हैं। इससे पता चला है कि बड़ी संख्या में लोगों की जासूसी की जा रही थी।

इसमें सबसे अधिक मामले पति-पत्नी के हैं। मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड लेकर पति-पत्नी एक-दूसरे की जासूसी करते हैं। इसके लिए कई युवक-युवतियों ने उससे संपर्क किया था। एक-दूसरे की जासूसी के लिए लोकेशन तक मंगवाई जाती थी।

इसके अलावा मैरिज से पहले लड़का-लड़की का परिवार भी होने वाले दूल्हा-दुल्हन को परखने के लिए जासूसी करवाता था। बड़ी संख्या में पुष्पेंद्र के ऑफिस से इसके रिकॉर्ड मिले हैं।

अब वो केस पढ़िए, जिनका खुलासा जासूस ने एटीएस के सामने किया है…

केस-1 : जयपुर के एक बिजनेसमैन को अपनी पत्नी पर शक था कि वो उसके ऑफिस जाने के बाद किसी से चोरी छिपे मिलती है। फोन पर बातचीत करती है, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही सारे सबूत मिटा देती है। शक को पुख्ता करने के लिए उसने अपनी पत्नी पर नजर रखना शुरू कर दिया।

काफी कोशिश के बाद भी कोई प्रफू उसके हाथ नहीं लगा। थक-हारकर उसने प्राइवेट डिटेक्टिव की मदद ली। पत्नी की कॉल डिटेल, सीडीआर (बातचीत के ऑडियो) के साथ लोकेशन निकलवाई। पत्नी के अफेयर का पता लगाने के लिए उसका पीछा करवा फोटोशूट भी करवाया।

केस-2 : जयपुर की एक हाई प्रोफाइल फैमिली ने बेटे की शादी के लिए लड़की पसंद की। सगाई के बाद ही लड़के वाली फैमिली ने आने वाली बहू के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जासूसी शुरू कर दी।

प्राइवेट डिटेक्टिव हायर किया और होने वाली बहू के आने-जाने से लेकर उसके मोबाइल कॉल पर बात करने वाले नंबरों की जानकारी जुटाई। बेटे की शादी से पहले परिवार बहू की पुरानी लाइफ के बारे में जानना चाहते थे।

अफेयर से लेकर बहू का किससे क्या अटैचमेंट है, इसकी जानकारी जुटाई। मोबाइल पर सबसे ज्यादा बात किन नंबरों पर होती है, उसके नाम पते निकलवाने के साथ ही उसका पूरा रिकॉर्ड निकलवाया गया। बिना लड़की वालों को पता लगे, गुपचुप तरीके से सभी डाउट क्लीयर होने के बाद बेटे की धूमधाम से शादी कर दी।

केस-3 : राजस्थान के बिजनेसमैन एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए भी प्राइवेट डिटेक्टिव हायर कर रहे हैं। एक बिजनेसमैन ने अपने कॉम्पिटिटर की जासूसी इसलिए करवाई ताकि वह जान सके कि उसका अगला प्रोजेक्ट क्या है।

सरकारी ठेके के लिए वह किससे मिल रहा है, कहां डील कर रहा है। प्राइवेट डिटेक्टर ने काम हाथ में लेने के बाद बिजनेसमैन का कई दिन तक पीछा किया। वह कहां, कब, किससे मिल रहा है, इसकी डिटेल निकाली। साथ ही कई सीक्रेट जानकारियां भी उसको लाकर दी।

कैसे हुआ जासूसी कांड का खुलासा?

ATS को मुखबिर तंत्र के जरिए काफी समय से सूचना मिल रही थी कि लोगों की प्राइवेट जानकारी निकाली जा रही है। इस काम में अवैध तरीके से जासूसी करने वाले लोग शामिल हैं, जो मोबाइल लोकेशन, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स) निकालकर पैसों के बदले बेच रहे हैं। इसी को लेकर ATS ने नजर रखने के साथ मुखबिरों को एक्टिव कर रखा था।

बीते रविवार को ATS के पास सूचना आई कि पुष्पेंद्र भूटानी नाम का एक शख्स है, जो खुद को बड़ा जासूस बताता है। वह इस तरह के काम में इन्वॉल्व है। उसने हाल ही में कई लोगों की सीडीआर के प्रिंटआउट निकलवाए हैं।

मुखबिर ने यह भी बताया कि जल्द ही वह पैसे लेकर सारे सबूत नष्ट करने वाला है। ऐसे में ATS ने सूचना का सत्यापन किया और अगले दिन सोमवार (10 जुलाई) को पुष्पेंद्र भूटानी के फ्लैट पर दबिश दी।

सांगानेर एयरपोर्ट के पीछे एक कॉलोनी में रॉयल एवेन्यू अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर- 908 की धावा बोलकर घंटी बजाई तो वह घर पर ही था।

एटीएस को देख पुष्पेंद्र ने वहां से भागने की कोशिश की। ऐसे में शक और पुख्ता हो गया। बाद में जब उसके घर की तलाशी ली तो कई सबूत ऐसे मिले, जिसे देख ATS के अधिकारी भी चौंक गए। पुष्पेंद्र के बेडरूम में टेबल पर एक सफेद पन्नों पर कुछ प्रिंटेड (हार्ड कॉपी) नंबर मिले।

यह एक मोबाइल नंबर की सीडीआर की हार्ड कॉपी थी। यानी एक मोबाइल नंबर से किन-किन लोगों को कॉल किया गया उसका पूरा रिकॉर्ड। कितने मिनट बात हुई, कितने बजे बजे कॉल हुआ, ये सब जानकारी थी। एटीएस ने वहां से सारे दस्तावेज जब्त किए। पुष्पेंद्र को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ शुरू की।

ATS से बोला- हां, मैं ही हूं डिटेक्टिव पुष्पेंद्र

उसने एटीएस के सामने कबूला कि वह प्राइवेट डिटेक्टिव पुष्पेंद्र भूटानी है। टेबल पर मिली दस्तावेज उसके एक क्लाइंट के थे, जिसने उसे जासूसी के लिए हायर किया था। पुष्पेंद्र का मोबाइल खंगाला तो कई राज खुले हैं। कबीर डार्क वेब के नाम से सेव दो मोबाइल नंबरों पर कई डिटेल्स का आदान-प्रदान किया गया था।

पूछने पर उसने बताया कि ये भी एक एजेंसी है, जो लोगों की कॉल डिटेल लीक करने का काम करती है। इसके बदले वह पैसे लेता है। कबीर नाम के व्यक्ति ने 7 मोबाइल नंबर की सीडीआर पुष्पेंद्र को भेज रखी थी।

दो पुलिसकर्मियों की भूमिका आई सामने

पुष्पेंद्र भूटानी के मोबाइल में कई पुलिसकर्मियों के नंबर सेव मिले हैं। पूछताछ में उसने बताया कि एक मोबाइल नंबर की CDR (कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड) उसने मोती डूंगरी थाने के पुलिसकर्मी मुकेश कुमार शर्मा से मंगवाई थी। उसके बदले 10 हजार रुपए दिए थे।

जांच में सामने आया है कि जयपुर कमिश्नरेट के एक अन्य पुलिसकर्मी शंकर यादव ने कई मोबाइल नंबरों की लोकेशन व सिम धारक का नाम-पता पुष्पेंद्र भूटानी को भेजे थे। इससे साफ है कि बिना पुलिस की मिलीभगत लोगों की पर्सनल डिटेल लीक कर जासूसी कराई जा रही थी। हालांकि दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच SOG-ATS कर रही है।

लोगों की पत्नियों का पीछा करता, तस्वीरें खींचता

प्राइवेट डिटेक्टिव भूटानी पैसों के लिए कोई भी टास्क पूरा करने के लिए हां भर देता था। इसके लिए वह हर अवैध तरीका अपनाता था।

कोई पैसों के बदले पत्नी की जासूसी का टास्क देता तो वह इसे पेशा मानकर शुरू कर देता। उनकी पत्नियों का कार या बाइक से पीछा करता। कई बार डिस्को-पब तक चोरी छिपे जाता और उनकी निजी तस्वीरें खींचकर पतियों तक पहुंचाता।

जासूसी के अलग-अलग पैकेज, हर डिटेल का अलग रेट

इस जासूसी के बदले वह सामने वाले से मनचाही रकम वसूलता था। यानी जितना कठिन काम, उसकी उतनी ज्यादा कीमत। पूछताछ में सामने आया कि पुष्पेंद्र ने जासूसी के लिए कई पैकेज बना रखे थे।

कई बार 3 दिन की जासूसी, सीडीआर देने के बदले वह 2 से तीन लाख रुपए तक लेता था। वहीं, जिस कबीर डार्क वेब नाम के शख्स से वह डिटेल निकलवाता था, उसका भी फिक्स रेट चार्ट बना रखा था।

आरोपी पुष्पेंद्र भूटानी ने बताया कि ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद कबीर उसे वॉट्सऐप पर मोबाइल नंबर की सीडीआर वॉट्सऐप पर भेज देता था।

इसमें मोबाइल कॉल डिटेल, सिम कार्ड ऑनर के नाम-पत्ते, उसकी लोकेशन तक बताने के लिए टाइम के हिसाब से रुपए लिए लेता था।

कबीर और अन्य सोर्स से प्राइवेट मोबाइल डाटा लेकर पुष्पेन्द्र इसमें अपना प्रॉफिट जोड़कर आगे ग्राहक को भेज देता था।

4 साल में 100 से ज्यादा लोगों की कर चुका जासूसी

सूत्रों की मानें तो पुष्पेन्द्र भूटानी पिछले 4 साल से प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी चला रहा था। इस दौरान उसके क्लाइंट्स भी बड़े बिजनेसमैन थे। पिछले 4 सालों में पुष्पेंद्र भूटानी के 100 से अधिक लोगों के लिए जासूसी कर चुका है।

सोशल मीडिया से ढूंढता था मालदार ग्राहक

ATS पूछताछ में पता चला है भूटानी ने ग्राहक ढूंढने के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी डिटेक्टिव एजेंसी और उसके काम के बारे में प्रचार कर रखा था।

वहां अपने मोबाइल नंबर भी दे रखे थे। ज्यादातर लोग वहीं से सर्च कर उससे संपर्क करते थे। इसके अलावा जिन लोगों के लिए वह पहले जासूसी कर चुका था, उनके जरिए भी आगे से आगे कई क्लाइंट्स मिलते चले जाते थे।

लोग कहते थे जुगाड़ी, कैसे बना डिटेक्टिव?

भूटानी किसी समय अपने दोस्तों और सर्किल में जुगाड़ी के नाम से प्रसिद्ध था। पहले वह लोगों के छोटे-मोटे काम करवाता था। उनके फंसे काम निकलवाने में माहिर था, इसलिए लोग भी झांसे में आकर उसको काम के बदले पैसा दे देते थे।

इन पैसों को वह महंगे ब्याज पर लोगों को देकर वसूली करता था, लेकिन मालदार पार्टियों-बिजनेसमैन तक अपनी पहुंच बनाने के लिए उसने नया तरीका ढूंढा।

चार साल पहले सांगानेर में अपनी डिटेक्टिव एजेंसी खोली। इसका कोई नाम नहीं रखा, क्योंकि उसने अपनी एजेंसी का रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवाया था।

पुष्पेंद्र भूटानी ने लोगों की अवैध तरीक से जासूसी करवा काफी पैसा कमाया। उसे गाड़ियों का इतना शौक है कि कुछ महीनों में ही नई कार खरीद लेता।

बताया जा रहा है पुष्पेंद्र भूटानी की लव मैरिज हुई थी। वह पिछले करीब 15 साल से जयपुर के प्रताप नगर इलाके में ही रह रहा है। उसके दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं।

कई राज्यों तक फैलाया जासूसी नेटवर्क

भूटानी का नेटवर्क राजस्थान के कई जिलों में फैला है। उसके सबसे मजबूत लिंक जयपुर के थानों से लेकर कई सरकारी दफ्तरों में होना अभी तक सामने आया है।

इसके साथ ही मुंबई और साउथ के कुछ शहरों में उसका नेटवर्क होने का ATS को पता चला है। डिटेक्टिव एजेंसी पुष्पेंद्र भूटानी अकेला चलाता था, लेकिन वह एक टीम के साथ मिलकर काम करता है। टीम में कितने और कौन-कौन लोग हैं, इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

SP या DCP ऑफिस से परमिशन, फिर निकलवा सकते हैं कॉल डिटेल

किसी भी व्यक्ति की कॉल डिटेल, लोकेशन और सीडीआर या तो उसकी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी यानी एयरटेल, जीओ, वोडाफोन जैसी कंपनियों के पास होती है। या फिर पुलिस अधिकारी को पास कानूनी शक्तियां होती हैं, जिसका इस्तेमाल कर ये भी कॉल डिटेल कंपनियों से निकलवा सकते हैं। लेकिन इसका भी एक लंबा प्रोसेस है।

  1. मोबाइल डिटेल निकलवाने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले किसी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होनी चाहिए। वो भी गंभीर धाराओं में हो तब।
  2. केवल उन मोबाइल नंबर की ही सीडीआर, लोकेशन और कॉल डिटेल निकलवाई जा सकती है, जो FIR में दर्ज हैं। या इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ और नंबर एड होते हैं।
  3. निकलवाई गई डिटेल का इस्तेमाल पुलिस केवल केस इन्वेस्टिगेशन में ही कर सकती है। कोई भी जानकारी FIR दर्ज करवाने वाली पार्टी या संबंधित वकील को भी नहीं दी जा सकती।
  4. FIR के आधार पर जांच अधिकारी एक लेटर बनाकर मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल, लोकेशन और सीडीआर निकलवाने के कारण को बताता है। कम्प्यूटर ऑपरेटर के जरिए FIR नंबर, धारा और मोबाइल नंबर की टेबल बनाई जाती है।
  5. थाने की मेल आईडी से उसे पहले DCP ऑफिस को मेल भेजा जाता है। DCP ऑफिस में मौजूद कंप्यूटर ऑपरेटर उसकी एंट्री करता है। फिर डीसीपी या जिले के SP ऑफिस का अधिकारी ही मोबाइल नेटवर्क कंपनी को कॉल डिटेल, लोकेशन और सीडीआर भेजने के लिए मेल लिखता है।
  6. उधर नेटवर्क कंपनी में इस जानकारी को शेयर करने के लिए अलग से टीम होती है जो मेल को वेरिफाई करती है। फिर उसी मेल के रिप्लाई में मांगी गई डिटेल इकट्‌ठी कर भेजती है

क्या होती है CDR

CDR का मतलब कॉल डिटेल रिकॉर्ड होता है, लेकिन इसमें भेजे गए एसएमएस और रिसीव किए गए एसएमएस में क्या लिखा था, इसका डेटा नहीं होता।

CDR से ये भी पता चलता है कि कॉल कहां से की गई। यानी फोन करने वाले की लोकेशन क्या थी? जिसको कॉल किया गया है, उसकी लोकेशन क्या थी? कॉल कैसे कटी? नार्मल तरीके से या कॉल ड्राप हुआ?

By khabarhardin

Journalist & Chief News Editor

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