Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षा का वचन देती हैं। लेकिन इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल का साया रहेगा। इसलिए इस दिन राखी नहीं बांधी जा सकती।

भद्रा काल को अशुभ काल माना जाता है। इस समय कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल में राखी बांधने से बचना चाहिए।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य और छाया की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। अपने भाई शनिदेव की तरह ही भद्रा का स्वभाव भी बहुत कठोर माना जाता है। वह हर शुभ कार्य में बाधा डालती थीं। ऐसे में उनके पिता सूर्यदेव ने भ्रदा पर नियंत्रण पाने के लिए ब्रह्माजी से मदद मांगी।

ब्रह्माजी ने भद्रा को नियंत्रित करने के लिए पंचांग के प्रमुख अंग विष्टिकरण में स्थान दिया था। उन्होंने कहा कि भद्रा लगी होने पर कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाएगा। लेकिन भद्रा के पश्चात उस कार्य को किया जा सकेगा।

हालांकि भद्रा के समय तंत्र-मंत्र की पूजा और कोर्ट-कचहरी का कोई काम करना अशुभ नहीं माना जाता है। लेकिन भद्रा में शादी विवाह, रक्षाबंधन, होलिका दहन जैसे शुभ कार्य करने को मना होता है।

Raksha bandhan 2023 : आज पूरे दिन भद्रा काल का साया, राखी नहीं बांध सकते

भद्रा के बारे में कुछ अन्य मान्यताएं

  • कुछ मान्यताओं के अनुसार, भद्रा एक राक्षसी थी। उसने भगवान शिव के तांडव से बचने के लिए अपने आप को छिपाने के लिए सूर्य की किरणों में छिप गई थी। इससे सूर्य की किरणों का प्रभाव कम हो गया और पृथ्वी पर अंधकार छा गया। तब भगवान शिव ने भद्रा को श्राप दिया कि वह हमेशा अशुभता का प्रतीक रहेगी।
  • एक अन्य मान्यता के अनुसार, भद्रा एक तांत्रिक महिला थी। उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि वह हर शुभ कार्य में बाधा डाल सकती है। लेकिन भद्रा ने इस वरदान का दुरुपयोग किया और हर शुभ कार्य में बाधा डालने लगी।

भद्रा का स्वभाव

भद्रा को एक क्रूर और कठोर स्वभाव वाली माना जाता है। वह हर शुभ कार्य में बाधा डालती थी। वह किसी भी तरह से खुशी और समृद्धि नहीं चाहती थी।

भद्रा का स्वभाव कठोर होने के बावजूद, उसे एक बहुत ही शक्तिशाली महिला भी माना जाता है। वह अपनी इच्छानुसार किसी भी कार्य को कर सकती है।

भद्रा और भाई-बहन का रिश्ता

भद्रा का वास पृथ्वी पर होने पर भाई-बहन के रिश्ते में खलल पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि भद्रा के प्रभाव से भाई-बहन के बीच झगड़े और कलह होते हैं।

इसलिए रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही राखी बांधनी चाहिए।

भद्रा को भाई-बहन के रिश्ते में खलल डालने वाली माना जाता है। इसलिए इस दिन भद्रा काल में राखी नहीं बांधने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास बना रहेगा।

By manmohan singh

News editor and Journalist

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