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अमेरिका का अफगानिस्तान से चले २० सालों के सघर्ष मे न केवल लाखों सैनिक और नागरिकों की जान गयी बल्कि अमेरिका और साथी सेनाओं को रूस जैसे देशों की इकॉनमी से भी दोगुना नुकसान हुआ.
कभी रूस के ही खिलाफ अपने द्वारा ही खड़े किये गए तालिबान ने अमेरिका को 20 साल तक उलझाए रखा और आखिरकार अमेरिका को ही अफगानिस्तान युद्ध बंद करना पड़ा. 2021 तक सभी अमेरिकी सैनिकों की अफनिस्तान से वापसी हो चुकी थी और तालिबान का शरीया शासन एक बार फिर से कायम हो गया
अमेरिका को हुआ नुक्सान
इस युद्ध से USA ने दुनिया को ये तो दिखा दिया की अमेरिका अपने ऊपर हमला होने पर किसी भी हद तक जा सकता है. मगर इसकी भारी कीमत पश्चिम को चुकानी पड़ी. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 2,400 अमेरिकी सैनिकों ने अपनी जान इस युद्ध गवाई और 52,000 से अधिक सैनिक घायल हो गए. साथ ही 60,000 से अधिक अफगानी सैनिकों ने भी अमेरिका लड़ते हुए अपनी जानें दी. तालिबान के करीब 51,191 आतंकी मारे गए
रूस की इकॉनमी से दुगना आर्थिक नुक्सान
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इस युद्ध मे $2.313 trillion का आर्थिक नुकसान उठाया जो की रूस की कुल जीडीपी का भी दुगना है, अब पश्चिम एक कूटनीतिक युद्ध की और है, जहाँ एक और Ukraine-रूस युद्ध में Ukraine को सहायता कर रूस को कमजोर किया जा रहा है. वही दूसरी और चीन के खिलाफ ताइवान को मदद का भरोसा देकर चीन के दरवाजे पर एक भयंकर युद्ध को खड़ा करना चाहता है.
भारत की इकॉनमी और साख पे हमला
भारत के द्वारा रूस से कच्चा तेल सस्ते दामों पे ख़रीदे जाने व चीन से विवाद बातचीत के द्वारा हल करने से बौखलाया पश्चिम अब भारत को भी सबक देना चाहता है इसी क्रम मे भारत के लोकप्रिय प्रधान मंत्री तथा विश्व के सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्ति श्री नरेंद्र मोदी पर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के द्वारा झूठे आरोप लगा कर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की गयी

अडानी पर ब्लूमबर्ग रिपोर्ट का उद्देश्य
देश और दुनिया के उभरते हुए बिजनेसमैन गौतम अडानी पर Hindenburg (अमेरिकन कंपनी ) द्वारा रिपोर्ट जारी कर भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर चोट पहुंचने का प्रयास किया गया. 24 जनवरी को रिपोर्ट के प्रकाशित होने से अब तक अडानी ने US$50.2 billion गवा दिए हैं
यह सारे प्रयास विश्व की उभरती हुई अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को रोक कर अपने वर्चस्व को बनाये रखने की रणनीति का एक भाग है










