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डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हटे या रहें, मंदी पक्की? Goldman Sachs की इस चेतावनी ने उड़ाए होश!

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Home बिजनेस

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हटे या रहें, मंदी पक्की? Goldman Sachs की इस चेतावनी ने उड़ाए होश!

by khabarhardin
अप्रैल 8, 2025
in बिजनेस, विदेश
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वैश्विक अर्थव्यवस्था एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ी है, जहां से आगे का रास्ता अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। एक तरफ जहां दुनिया भर के देश महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों, खासकर उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। सवाल यह है कि क्या ये टैरिफ हटाए जाएं तो अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी, या फिर इनके बने रहने से मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा? इस जटिल परिदृश्य के बीच, प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स की एक हालिया चेतावनी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। गोल्डमैन सैक्स ने आगाह किया है कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हटें या बने रहें, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आना लगभग तय है। इस चौंकाने वाली भविष्यवाणी ने आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच खलबली मचा दी है, और हर कोई इस चेतावनी के निहितार्थों को समझने की कोशिश में जुटा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को जोर-शोर से आगे बढ़ाया था। इस नीति के तहत, उन्होंने कई देशों से आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क (टैरिफ) लगाए थे। चीन, यूरोपीय संघ और कई अन्य व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य उत्पादों पर लगाए गए इन टैरिफ का मकसद अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना था। ट्रंप का मानना था कि ये टैरिफ अमेरिकी नौकरियों को वापस लाएंगे और व्यापार घाटे को कम करेंगे। हालांकि, इन टैरिफ ने वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था और कई देशों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर भी शुल्क लगा दिए थे।

इन टैरिफ के परिणामस्वरूप, अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों को आयातित सामान के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ी, जिससे महंगाई बढ़ी। इसके अलावा, जवाबी टैरिफ के कारण अमेरिकी निर्यातकों को भी नुकसान हुआ, क्योंकि उनके उत्पादों पर अन्य देशों में शुल्क लग गया था। वैश्विक स्तर पर, इन व्यापारिक तनावों ने अनिश्चितता का माहौल पैदा किया, जिससे निवेश और आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। कई अर्थशास्त्रियों ने उस समय भी इन टैरिफ की आलोचना की थी और चेतावनी दी थी कि इनसे आर्थिक नुकसान हो सकता है।

अब, जब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं, तो उनकी व्यापार नीतियां फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। यह सवाल महत्वपूर्ण है कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो क्या उनकी टैरिफ नीतियां जारी रहेंगी या उनमें कोई बदलाव आएगा? और इन नीतियों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

गोल्डमैन सैक्स की हालिया चेतावनी इस बहस को एक नया मोड़ देती है। संस्थान का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां इतनी नाजुक हैं कि ट्रंप के टैरिफ हटें या बने रहें, मंदी का खतरा टलने वाला नहीं है। इस चेतावनी के पीछे गोल्डमैन सैक्स ने कई महत्वपूर्ण कारकों का हवाला दिया है।

टैरिफ बने रहने की स्थिति में मंदी का खतरा:

अगर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बने रहते हैं, तो इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं:

  • उच्च मुद्रास्फीति: टैरिफ आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। यह मुद्रास्फीति के दबाव को और बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर के देश पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।
  • बाधित आपूर्ति श्रृंखलाएं: टैरिफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं। कंपनियां लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन और वितरण नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। टैरिफ इन नेटवर्क को महंगा और कम कुशल बना सकते हैं।
  • घटा हुआ व्यापार और निवेश: व्यापार युद्ध और टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में कमी आ सकती है। अनिश्चितता के माहौल में कंपनियां नए निवेश करने से हिचकिचा सकती हैं, जिससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है।
  • जवाबी कार्रवाई का खतरा: अगर अमेरिका अपने टैरिफ को बनाए रखता है, तो अन्य देश भी जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को और नुकसान हो सकता है।
  • उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव: कुछ अमेरिकी उद्योग, जो आयातित कच्चे माल या मध्यवर्ती वस्तुओं पर निर्भर हैं, टैरिफ के कारण बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। उनकी लागत बढ़ सकती है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है।

गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि ये कारक मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकते हैं। टैरिफ के बने रहने से पहले से ही दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था पर और अधिक बोझ पड़ेगा, जिससे विकास की गति धीमी हो जाएगी और अंततः मंदी आ सकती है।

टैरिफ हटने की स्थिति में भी मंदी का खतरा:

यह सुनकर आश्चर्य हो सकता है, लेकिन गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हटा भी दिए जाते हैं, तो भी मंदी का खतरा पूरी तरह से टलेगा नहीं। इसके पीछे संस्थान ने निम्नलिखित कारण बताए हैं:

  • पिछला नुकसान: टैरिफ ने पहले ही वैश्विक व्यापार और निवेश को नुकसान पहुंचाया है। आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और बढ़ी हुई लागत का प्रभाव अभी भी महसूस किया जा रहा है। टैरिफ हटाने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पिछले नुकसान की भरपाई में समय लगेगा।
  • अन्य आर्थिक चुनौतियां: वैश्विक अर्थव्यवस्था कई अन्य चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ती ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। टैरिफ हटाने से इन चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।
  • संरचनात्मक मुद्दे: वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुछ संरचनात्मक मुद्दे हैं, जैसे कि जनसांख्यिकी परिवर्तन और उत्पादकता में धीमी वृद्धि, जो आर्थिक विकास को बाधित कर रहे हैं। टैरिफ हटाने से इन मुद्दों का समाधान नहीं होगा।
  • नीतिगत अनिश्चितता: अगर टैरिफ हटा भी दिए जाते हैं, तो भी भविष्य में व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, खासकर अगर डोनाल्ड ट्रंप फिर से सत्ता में आते हैं। यह अनिश्चितता व्यवसायों को निवेश करने से रोक सकती है।
  • विलंबित प्रभाव: टैरिफ का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे सामने आता है। भले ही टैरिफ हटा दिए जाएं, लेकिन उनका संचित प्रभाव अभी भी आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकता है।

गोल्डमैन सैक्स का तर्क है कि टैरिफ हटाने से कुछ सकारात्मक प्रभाव जरूर पड़ेंगे, लेकिन यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अन्य मौजूदा आर्थिक चुनौतियां और पिछली व्यापार नीतियों का प्रभाव मिलकर मंदी का कारण बन सकते हैं।

गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी के निहितार्थ:

गोल्डमैन सैक्स की यह चेतावनी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है। यह दर्शाता है कि व्यापार नीतियां, खासकर टैरिफ, अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। इस चेतावनी के कुछ महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं:

  • नीति निर्माताओं के लिए चुनौती: यह चेतावनी नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। उन्हें न केवल व्यापार नीतियों पर ध्यान देना होगा, बल्कि अन्य आर्थिक चुनौतियों का भी समाधान ढूंढना होगा। एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है ताकि मंदी के खतरे को कम किया जा सके।
  • व्यवसायों के लिए सतर्कता: व्यवसायों को इस संभावित मंदी के लिए तैयार रहना होगा। उन्हें अपनी लागत को नियंत्रित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी।
  • निवेशकों के लिए जोखिम: निवेशकों को बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के लिए तैयार रहना होगा। उन्हें अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम को कम करने वाली रणनीतियों पर विचार करना चाहिए।
  • वैश्विक सहयोग की आवश्यकता: मंदी के खतरे से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग की आवश्यकता है। देशों को व्यापार विवादों को हल करने, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना होगा।

अन्य अर्थशास्त्रियों की राय:

हालांकि गोल्डमैन सैक्स ने मंदी की चेतावनी दी है, लेकिन सभी अर्थशास्त्री इससे सहमत नहीं हैं। कुछ का मानना है कि अगर टैरिफ हटा दिए जाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है और मंदी को टाला जा सकता है। उनका तर्क है कि टैरिफ हटाने से व्यापार बढ़ेगा, आपूर्ति श्रृंखलाएं सुधरेंगी और मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा। हालांकि, वे भी मानते हैं कि अन्य आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना जरूरी होगा।

कुछ अन्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मंदी का खतरा अभी भी बना हुआ है, भले ही टैरिफ हटा दिए जाएं या बने रहें। उनका तर्क है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित कमजोरियां हैं, जैसे कि उच्च ऋण स्तर और कमजोर मांग, जो मंदी का कारण बन सकती हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव:

वैश्विक मंदी का भारत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और वैश्विक व्यापार पर काफी हद तक निर्भर है। अगर वैश्विक मांग में कमी आती है, तो भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का भी भारत पर प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू मांग और सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के कारण वैश्विक मंदी का भारत पर उतना बुरा असर नहीं होगा जितना अन्य देशों पर हो सकता है। फिर भी, भारत को वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होगी और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

गोल्डमैन सैक्स की यह चेतावनी कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हटें या बने रहें, मंदी आना लगभग तय है, एक गंभीर मसला है जिस पर पूरी दुनिया को ध्यान देना होगा। यह चेतावनी दर्शाती है कि व्यापार नीतियां और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कितनी जटिल रूप से जुड़ी हुई हैं। टैरिफ ने पहले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, और उनके बने रहने से यह नुकसान और बढ़ सकता है। वहीं, अगर टैरिफ हटा भी दिए जाते हैं, तो भी अन्य आर्थिक चुनौतियां मंदी का खतरा पैदा कर सकती हैं।

इस परिदृश्य में, नीति निर्माताओं, व्यवसायों और निवेशकों सभी को सतर्क रहने और संभावित मंदी के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। वैश्विक सहयोग और समन्वित नीतिगत प्रयासों से ही इस खतरे को कम किया जा सकता है और टिकाऊ आर्थिक विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है। गोल्डमैन सैक्स की यह चेतावनी एक वेक-अप कॉल है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक नेता इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं और क्या वे मंदी को टालने में सफल हो पाते हैं।<ctrl95>

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Journalist & Chief News Editor

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