राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे एक ऐसा नाम है, जिसने अपनी सियासी पारी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन एक बात निश्चित है कि वे एक कुशल राजनेत्री हैं, जो किसी भी हालत में अपने लक्ष्य को हासिल करने में पीछे नहीं हटती हैं।

उनके व्यक्तित्व का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि वे कैसा भी टकराव मोल लेकर दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बना सकती हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत और जसवंत सिंह उनके सबसे बड़े पैरोकार थे, लेकिन इनके साथ उनके रिश्ते बहुत खराब भी रहे।

देवीसिंह भाटी, कैलाश मेघवाल, प्रह्लाद गुंजल, गुलाबचंद कटारिया, नरपतसिंह राजवी जैसे कितने ही नेता हैं, जिनके साथ उनके रिश्ते बेहद कटुतापूर्ण हुए; लेकिन एक समय ऐसा भी आया, जब ये इनके साथ घी-शक्कर होते दिखे।

यह भी दिलचस्प है कि वे ही गजेंद्र सिंह शेखावत, दीयाकुमारी, अर्जुनराम मेघवाल जैसे नेताओं को पार्टी में लेकर आईं, लेकिन ये ही आज उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं।

लेकिन केंद्र में मोदी-शाह के उत्कर्ष के बाद लग रहा था कि वसुंधरा राजे किसी न किसी तरह उनके साथ भी तालमेल बिठा लेंगी और राजस्थान भाजपा एक नए रूप में होगी लेकिन चाल-चरित्र और चेहरों के बदलाव की राह पर दौड़ पड़ी भाजपा की सियासत अब नए रंग और तरंग पर है।

राजस्थान में शेखावाटी हो या ढुंढाड़, नहरी इलाका हो या हाड़ौती, ब्रज-डांग हो या मेवाड़-मारवाड़ और वागड़, वसुंधरा राजे की वर्तमान स्थति को लेकर हर जगह सवाल हो रहे हैं और लोगों को उनकी कमी खल रही है।

आज केंद्र के साथ उनके रिश्तों को लेकर बहुत सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि पार्टी या केंद्रीय नेतृत्व के प्रति उनकी कोई नाराज़गी है।

शेखावाटी के उनके एक मुरीद की प्रतिक्रिया कुछ यों सामने आई :

ये दाग़-दाग़ उजाला, ये शबगज़ीदा सहर। वो इंतज़ार था जिसका, ये वो सहर तो नहीं।

वसुंधरा राजे की वर्तमान स्थिति राजस्थान की राजनीति के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या वे फिर से सक्रिय राजनीति में लौटेंगी? क्या वे भाजपा के साथ ही रहेंगी? इन सवालों के जवाब आने अभी बाकी हैं। लेकिन एक बात निश्चित है कि वसुंधरा राजे राजस्थान की राजनीति में एक ज़रूरी शख्सियत हैं, जिनका प्रभाव आने वाले समय में भी बना रहेगा।

वसुंधरा राजे एक ऐसी नेता हैं, जो किसी भी हालत में अपने लक्ष्य को हासिल करने में पीछे नहीं हटती हैं। वे एक कुशल राजनेत्री हैं, जो अपने विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने में माहिर हैं।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं कि वसुंधरा राजे एक विवादास्पद नेता हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन एक बात निश्चित है कि वे एक मजबूत नेता हैं, जिनका प्रभाव राजस्थान की राजनीति में हमेशा बना रहेगा।

उनका मानना है कि वसुंधरा राजे की वर्तमान स्थिति राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। उनकी अनुपस्थिति से भाजपा को काफी नुकसान हो रहा है। लेकिन कांग्रेस को भी इस स्थिति का फायदा नहीं मिल रहा है।

By khabarhardin

Journalist & Chief News Editor

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