जयपुर : राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 20 दिसंबर को होने हैं। इस बीच, एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि पिछले 25 सालों से कोई भी परिवहन मंत्री अगला चुनाव नहीं जीत पाया है। क्या मौजूदा परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और ओला इस परंपरा को तोड़ पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।

राजस्थान में परिवहन मंत्री पद पर रहने वाले नेता 1993 से लेकर 2018 तक के विधानसभा चुनावों में हर बार हारे हैं। इस दौरान, परिवहन मंत्री के रूप में काम करने वाले 9 नेताओं में से कोई भी अगले चुनाव में जीत नहीं पाया है। इनमें भाजपा के रोहिताश शर्मा, छोगाराम बाकोलिया, बनवारी लाल बैरवा, यूनुस खान, और कांग्रेस के बृजकिशोर शर्मा, वीरेंद्र बेनीवाल, यूनुस खान शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिवहन मंत्री पद पर रहने वाले नेताओं को अक्सर जनता से जुड़ी शिकायतों का सामना करना पड़ता है। इन शिकायतों में यातायात जाम, ऑटो रिक्शा और टैक्सी की बढ़ती कीमतें, और परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता शामिल हैं। इन शिकायतों को दूर करने में नाकाम रहने के कारण परिवहन मंत्री अक्सर वोटर्स की नाराजगी का सामना करते हैं।

खाचरियावास और ओला ने कहा है कि वे परिवहन सेवाओं में सुधार के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे यातायात जाम को कम करने, ऑटो रिक्शा और टैक्सी की कीमतों को नियंत्रित करने, और परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

अब देखना है कि खाचरियावास और ओला की इन कोशिशों को वोटर्स कितनी सराहना करते हैं। अगर वोटर्स को लगता है कि परिवहन मंत्री ने उनकी समस्याओं का समाधान किया है, तो वे उन्हें अगले चुनाव में भी चुन सकते हैं।

खाचरियावास और ओला की स्थिति

खाचरियावास वर्तमान में सिविल लाइंस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भाजपा के राकेश मीणा से कड़ी टक्कर मिल रही है। ओला जयपुर शहर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें भाजपा के प्रदीप यादव से कड़ी टक्कर मिल रही है।

मतदाताओं के रुख को देखकर लगता है कि खाचरियावास की स्थिति ओला की तुलना में बेहतर है। खाचरियावास के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने परिवहन मंत्री रहते हुए कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। उन्होंने यातायात जाम को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने ऑटो रिक्शा और टैक्सी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भी काम किया है।

ओला के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने परिवहन मंत्री रहते हुए कई नए काम शुरू किए हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए भी काम किया है।

अब देखना है कि 20 दिसंबर को मतदाता किसको अपना वोट देते हैं। अगर खाचरियावास और ओला चुनाव जीत जाते हैं, तो वे परिवहन मंत्री की हार के 25 साल पुराने सिलसिले को तोड़ देंगे।

By khabarhardin

Journalist & Chief News Editor

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