राजस्थान के सीनियर IAS के यहां ED की छापेमारी: 24 ठिकानों पर ईडी की रेड, जल जीवन मिशन घोटाले में कार्रवाई

जयपुर, 3 नवंबर 2023: राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने जलदाय विभाग के ACS सुबोध अग्रवाल समेत कई अधिकारियों और ठेकेदारों के आवास पर छापेमारी की है। राजस्थान में 24 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की गई है।

सुबह करीब 8 बजे ईडी की तीन टीमें सचिवालय पहुंची और सुबोध अग्रवाल के कार्यालय पर सर्च करना शुरू किया। गांधी नगर स्थित जलदाय विभाग के एक सीनियर अधिकारी के घर पर भी ईडी की टीमें सर्च कर रही हैं।

इसके अलावा, ईडी की टीम ने जयपुर, अलवर, नीमराना, बहरोड़ और शाहपुरा जैसे शहरों में भी छापेमारी की है। इन छापों में जलदाय विभाग के अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य लोगों के घरों, कार्यालयों और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई है।

बता दें कि करीब 2 महीने पहले भी ईडी ने जयपुर में अलग-अलग जगह रेड मारी थी। सर्च के दौरान ढाई करोड़ रुपए कैश और सोने की ईट मिली थी। ईडी को प्रॉपर्टी कारोबारी संजय बड़ाया और कल्याण सिंह कव्या के घर से कई दस्तावेज भी मिले थे। इसके बाद सीनियर आईएएस अधिकारी (जलदाय विभाग के ACS) सुबोध अग्रवाल का नाम सामने आया था।

ईडी की इस कार्रवाई से राजस्थान में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और ठेकेदारों में भय का माहौल है। माना जा रहा है कि ईडी की इस कार्रवाई से जल जीवन मिशन घोटाले के नए राज उजागर हो सकते हैं।

ईडी की कार्रवाई के बाद क्या होगा?

ईडी की इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि जल जीवन मिशन घोटाले की जांच तेज हो जाएगी। ईडी ने इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। माना जा रहा है कि ईडी जल्द ही इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।

इस मामले में सुबोध अग्रवाल का नाम सबसे पहले सामने आया था। ईडी ने सुबोध अग्रवाल को इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के दौरान सुबोध अग्रवाल ने कई अहम खुलासे किए हैं। इन खुलासों के आधार पर ईडी ने अब इस मामले में छापेमारी की है।

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्थान में इस योजना के तहत करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।

इस योजना के कार्यान्वयन में कथित रूप से भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर राजस्थान सरकार ने इस मामले में जांच के लिए एसीबी को लगाया था। एसीबी की जांच में कई अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आई थी।

एसीबी की जांच के आधार पर ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। ईडी की जांच में यह सामने आया है कि इस घोटाले में करोड़ों रुपए का गबन हुआ है।

By khabarhardin

Journalist & Chief News Editor

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