उदयपुर: बॉक्स ऑफिस पर अक्सर बड़े बैनर, करोड़ों का प्रमोशन और सुपरस्टार्स का शोर सुनाई देता है, लेकिन 16 जनवरी 2026 को ‘सागवान’ ने इन सभी किताबी दावों को ध्वस्त कर दिया। बिना किसी ‘यशराज’ या ‘धर्मा’ जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस के, एक विशुद्ध राजस्थानी टीम द्वारा तैयार की गई इस फिल्म ने पहले ही दिन ‘हाउसफुल’ का बोर्ड टांग कर फिल्म पंडितों को गणित बदलने पर मजबूर कर दिया है।
हुनर का डंका: जब ‘लोकल’ बना ‘ग्लोबल’
फिल्म जगत में चर्चा है कि आखिर यह करिश्मा हुआ कैसे? इसका जवाब है— राजस्थानी माटी की ईमानदारी और स्थानीय कलाकारों का बेजोड़ हुनर। पिछले 25 वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि किसी फिल्म का हीरो, निर्देशक, लेखक, एडिटर, डीओपी और संगीतकार—सभी राजस्थान के ही हैं।
मुंबई के समीक्षकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि फिल्म की विजुअल क्वालिटी और तकनीकी बारीकियां किसी बड़े बजट की बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं हैं। राजस्थानी कलाकारों ने यह साबित कर दिया कि हुनर किसी बड़े शहर का मोहताज नहीं होता।
सफलता के 3 मुख्य कारण: जिसने दर्शकों को खींचा
- रीयल हीरो की रीयल कहानी: फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) खुद हिमांशु सिंह राजावत हैं। जनता एक ऐसे पुलिस अधिकारी को पर्दे पर देखने के लिए उमड़ पड़ी, जो वास्तव में समाज में बदलाव ला रहा है। लोगों के लिए यह सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अपने ‘रीयल लाइफ हीरो’ के प्रति सम्मान था।
- अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार: मेवाड़ के जंगलों की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म एक ऐसी सच्ची मर्डर मिस्ट्री को उजागर करती है, जिससे हर आम आदमी जुड़ाव महसूस करता है। ‘सागवान’ ने उस अंधविश्वास पर चोट की है जो आज भी ग्रामीण अंचलों में मासूमों का शिकार कर रहा है।
- अश्लीलता से कोसों दूर ‘क्लीन सिनेमा’: आज के दौर में जहाँ क्षेत्रीय सिनेमा अश्लीलता के आरोपों से घिरा रहता है, ‘सागवान’ को सेंसर बोर्ड द्वारा बिना किसी कट के ‘U’ सर्टिफिकेट मिलना इसकी सबसे बड़ी जीत रही। परिवारों ने सामूहिक रूप से थिएटर जाकर इस फिल्म का समर्थन किया।
दर्शकों का जोश: “यह राजस्थान की जीत है”
सिनेमाघरों के बाहर दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। उदयपुर के एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने आए युवा समूह ने कहा:
“हम यहाँ यह देखने आए थे कि क्या हमारे राजस्थान के कलाकार बॉलीवुड जैसा सिनेमा बना सकते हैं? लेकिन फिल्म देखकर लगा कि इन्होंने तो बॉलीवुड से भी बेहतर कर दिखाया है। सयाजी शिंदे और मिलिंद गुणाजी जैसे दिग्गजों के बीच हमारे हिमांशु जी और स्थानीय कलाकारों ने जो काम किया है, उसने हमें सन्न कर दिया है।”
पहले दिन की हाउसफुल रिपोर्ट के बाद अब गुजरात और मध्य प्रदेश के वितरकों ने भी फिल्म के शोज बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है। बिना किसी गॉडफादर के, केवल कंटेंट और काबिलियत के दम पर ‘सागवान’ ने राजस्थानी सिनेमा के लिए एक नया ‘रोडमैप’ तैयार कर दिया है।











