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उदयपुर ज़िले की मावली तहसील के मेड़ता गाँव के किसान पिछले कई सालों से एक ही समस्या झेल रहे हैं – हर साल बारिश के मौसम में उनकी मेहनत से उगाई हुई फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो जाती हैं। वजह? पंचायत और प्रशासन की लापरवाही और तालाब से जुड़ा भ्रष्ट खेल।
तालाब से खेतों तक तबाही
गाँव के मोरिया रोड पर स्थित तालाब की ज़मीन निजी हाथों में है। जैसे ही बरसात से तालाब भर जाता है, तालाब के अंदर की जमीन के मालिक जानबूझकर बाँध तोड़ देते हैं। इससे तालाब का सारा पानी पास के खेतों में भर जाता है और किसानों की पूरी-की-पूरी फसल चौपट हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह हर साल होने वाला खेल है। किसान मेहनत, पसीना और पैसा लगाकर फसल बोते हैं, लेकिन जब फसल कटाई के करीब आती है, तो तालाब तोड़ने की इस हरकत से उनकी सारी मेहनत पानी में बह जाती है।
पंचायत की चुप्पी और भ्रष्टाचार
गाँव के लोगों का आरोप है कि पंचायत और प्रशासन की खुली लापरवाही इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है। अगर पंचायत चाहे तो तालाब की जमीन अधिग्रहण करके बाँध का पक्का निर्माण करवा सकती है। लेकिन स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की भ्रष्ट राजनीति के चलते कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
किसानों का कहना है कि पंचायत और प्रशासन को इस समस्या की जानकारी है, लेकिन सब जानते-बूझते मौन साधे हुए हैं।
ग्रामीणों की माँग और चेतावनी
ग्रामीणों ने अब सरकार और पंचायत से दो टूक माँग रखी है –
- या तो इस तालाब को सरकार अपने कब्ज़े में लेकर मजबूत बाँध का निर्माण करे।
- या फिर हर साल होने वाले नुकसान की भरपाई पंचायत करे।
साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे तेज़ विरोध-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
सवाल वही – जिम्मेदार कौन?
एक तरफ़ सरकार किसानों की मदद के लिए रोज़ नई-नई योजनाएँ बनाती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात ऐसे हैं कि फसलें योजनाओं से नहीं, तालाब के पानी से डूब रही हैं।
गाँव वालों का सवाल बिल्कुल सीधा है –
“किसानों की बरबादी का असली जिम्मेदार कौन – तालाब का मालिक, पंचायत या प्रशासन?”












