Success Story : अगर आप भी सोचते हैं कि सिर्फ डिग्री से नौकरी मिल जाएगी, तो Joydeep Dutta की कहानी आपके लिए एक सीख हो सकती है। पश्चिम बंगाल के छोटे से शहर माणबाजार के रहने वाले Joydeep की कहानी संघर्ष और सफलता का अनोखा मिश्रण है।
शुरुआती पढ़ाई और MCA का सफर
Joydeep Dutta का जन्म 26 मार्च 1991 को हुआ। उन्होंने अपनी 10वीं और 12वीं Manbazar Radha Madhab Institution से पूरी की। 12वीं में उनकी परसेंटेज 58.89% थी, जिसके कारण उन्हें मनचाहा कॉलेज नहीं मिला। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और Asansol Bidhan Chandra College से BCA (2011) किया।

MCA के लिए उन्होंने JECA Exam दिया, लेकिन रिजल्ट मनमुताबिक नहीं आया। MBA का प्लान था, लेकिन आखिरकार MCA (2014) पूरा किया।
गैरेज में रहकर की पढ़ाई
पढ़ाई के दौरान संसाधनों की कमी थी। महज 400 रुपये किराए के गैरेज में रहकर उन्होंने MCA की तैयारी की। साधारण Nokia 1110 मोबाइल के साथ पढ़ाई की, और पहली सैलरी आने के बाद ही नया मोबाइल खरीदा।
नौकरी नहीं मिली, तो नया रास्ता खोजा
MCA के बाद नौकरी की तलाश में 50 से ज्यादा कंपनियों में अप्लाई किया, लेकिन 60% throughout criteria के कारण इंटरव्यू का मौका भी नहीं मिला। Capgemini के ऑफ-कैंपस में 90% स्कोर किया, लेकिन कम्युनिकेशन स्किल के कारण रिजेक्शन मिला।
जब नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने ब्लॉगिंग और डिजिटल मार्केटिंग में हाथ आजमाया।
Affnosys India की शुरुआत और सफलता
2019 में उन्होंने अपनी खुद की IT कंपनी Affnosys India की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में 131 वर्क-फ्रॉम-होम इंटर्न्स के साथ काम किया। लेकिन लॉकडाउन के कारण बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ और उन्हें सबकुछ छोड़कर वापस गांव लौटना पड़ा।
2023 में उन्होंने फिर से शुरुआत की और जमशेदपुर में नया ऑफिस लिया। आज उनकी कंपनी 70-80 लाख रुपये सालाना टर्नओवर कर रही है।
सीखने लायक बात?
Joydeep Dutta की कहानी बताती है कि डिग्री ही सबकुछ नहीं होती, असली ताकत स्किल और मेहनत में होती है। अगर एक गैरेज से निकलकर कोई करोड़ों की कंपनी बना सकता है, तो मेहनत करने वालों के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है!