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तख़तगढ़, राजस्थान – पिछले कुछ दिनों से सुर्ख़ियों में बने हुए युवाचार्य अभयदास जी, जिनके बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं, हाल ही में अपनी 15 दिनों की अमेरिका यात्रा से वापस लौटे हैं। अमेरिका में उन्होंने ह्यूस्टन शहर के शिव शक्ति मंदिर में आयोजित “शिव कौन हैं?” विशेष सत्र में शिरकत की और श्रोताओं को शिव तत्व का ज्ञान दिया।
युवाचार्य अभयदास ने अपने अमेरिका प्रवास के बारे में बताते हुए कहा, “अमेरिका के ह्यूस्टन शहर के शिव शक्ति मंदिर में आयोजित “शिव कौन हैं ?” विशेष सत्र में अपने भाव प्रस्तुत कर अति आनंद की प्राप्ति हुई। युग पुरूष तुलसी दास जी द्वारा रचित शिव रूद्राष्टकम् एवं आदी गुरू शंकराचार्य जी के आराध्य भगवान शिव की व्याख्या अद्भुत एवं अद्वितीय हैं, उनको मूल रूप से सभी श्रोताओं के समक्ष रखना यह अनुभव भी अविस्मरणीय रहा। इस यात्रा में मेरे साथ सहयोगी पूज्य श्री रामदासजी शास्त्री जी ने भी अपनी उपस्थिति एवं भाव प्रवाह में शिवत्व को सभी के समक्ष रखा। इस 15 दिवसीय यात्रा को पूरा कर अभी भारत के लिए प्रस्थान करूँगा, यह यात्रा कई अनुभवों को दे गई।”

भारत लौटने के बाद, युवाचार्य अभयदास सीधे पुणे पहुँचे जहाँ उन्होंने MIT पीस यूनिवर्सिटी में आयोजित विज्ञान, अध्यात्म/धर्म की 10वीं विश्व शांति संसद के उद्घाटन सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में विश्व भर से आए धर्मगुरुओं, वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक नेताओं ने शिरकत की।
युवाचार्य अभयदास ने सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के युद्ध और हिंसा से ग्रस्त विश्व को आध्यात्म ही शांति का रास्ता दिखा सकता है। उन्होंने सनातन धर्म की शांति स्थापना में भूमिका की प्रशंसा की और सभी को धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए MIT पीस यूनिवर्सिटी के प्रमुख डॉ. श्री विश्वनाथ कराड और श्री राहुल कराड का आभार व्यक्त किया।











